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सूरजपुर



पोल्ट्री पालन से सशक्त हो रहीं महिला किसान दीदियां

– मुख्यमंत्री की मंशानुरूप ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर बढ़ाई जा रही आजीविका

*- विष्णु भैया के प्रयासों से बढ़ा हमारा आत्मविश्वास-हुस्ना परवीन*

*सूरजपुर/06 सितंबर 2026/* मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में  जिले में निरंतर प्रयास किया जा रहा है इसी कड़ी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर  के माध्यम से महिला किसान दीदियों को कृषि के साथ पशुधन आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी आजीविका को सुदृढ़ किया जा रहा है।
            कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में प्रशासन द्वारा शिवनंदनपुर स्थित उमंग महिला क्लस्टर संगठन के अंतर्गत आईएफसी से जुड़ी 300 महिला किसान दीदियों को पोल्ट्री पालन की गतिविधि से जोड़ा गया है। इसके तहत चयनित उद्यमी दीदी को 25 हजार की ऋण सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्होंने ब्रूडिंग सेंटर की शुरुआत की है। इस पहल से महिलाओं को पोल्ट्री पालन के माध्यम से नियमित एवं अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।

*500 चूजों से शुरुआत, पहली बिक्री में मिला 6 हजार रुपए का शुद्ध लाभ*
पोल्ट्री पालन की शुरुआत 500 चूजों के ब्रूडिंग से की गई। महिला किसान दीदियों को चूजों के वैज्ञानिक पालन-पोषण, संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल, उचित आवास, टीकाकरण एवं स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। प्रारंभिक चरण में 400 चूजों की बिक्री की जा चुकी है, जिससे उद्यमी दीदी को लगभग 06 हजार रूपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। कम लागत में शुरू की गई इस गतिविधि से महिलाओं को अपने गांव में ही आय का साधन विकसित करने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल रहा है।

*खेती के साथ पशुधन आधारित गतिविधियों को मिल रहा बढ़ावा :-*
इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के माध्यम से महिला किसानों को केवल कृषि तक सीमित न रखते हुए कृषि, पशुपालन और पोल्ट्री जैसी बहुआयामी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए आय के विविध स्रोत विकसित हो रहे हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसरों का विस्तार हो रहा है।
          विकासखंड परियोजना प्रबंधक माधुरी भंडारी ने बताया कि आईएफसी के अंतर्गत कृषि के साथ पशुधन आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देकर महिलाओं के लिए बहुआयामी एवं टिकाऊ आजीविका मॉडल विकसित किया जा रहा है। महिला किसानों को उत्पादन से लेकर उचित प्रबंधन एवं विपणन तक आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि पोल्ट्री पालन को व्यवसायिक और टिकाऊ आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित किया जा सके।

*महिला सशक्तिकरण को मिल रही नई दिशा :-*
बिहान से जुड़ी महिला किसान दीदियां समूह आधारित गतिविधियों के माध्यम से स्वरोजगार, आय वृद्धि और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पोल्ट्री पालन जैसी गतिविधियां महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक बन रही हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप जिले में महिला स्व-सहायता समूहों को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
              ग्राम दतिमा की हुस्ना परवीन बताती हैं कि बिहान के माध्यम से उन्हें गांव में ही रोजगार का अवसर मिल रहा है। पोल्ट्री पालन के लिए चूजे, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि विष्णु भैया महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जो प्रयास कर रहे हैं, उसका लाभ हम जैसी ग्रामीण महिलाओं को सीधे मिल रहा है। अब हम अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ खुद भी आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।

Binod Gupta Binod Gupta September 6, 2026
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सूरजपुर

राष्ट्र निर्माण के शिल्पकार शिक्षकों का अभाविप प्रतापपुर ने किया सम्मान

प्रतापपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (अभाविप) जिला सूरजपुर, इकाई प्रतापपुर द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर शुक्रवार, 05 सितम्बर को नगर के शासकीय कालिदास महाविद्यालय एवं विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर शिक्षकों का सम्मान किया गया। अभाविप कार्यकर्ताओं ने शिक्षकों को श्रीफल, पेन एवं डायरी भेंट कर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए अभाविप कार्यकर्ताओं ने बताया कि शिक्षक समाज का सच्चा शिल्पकार होता है। शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक सशक्त, संस्कारित एवं विकसित समाज के निर्माण में शिक्षकों का योगदान सदैव अतुलनीय रहा है।
अभाविप कार्यकर्ताओं ने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा प्रदान करने का कार्य नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन को सही दिशा देकर उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक विद्यार्थी और समाज का दायित्व है।
अभाविप के कार्यकर्ताओं ने महाविद्यालय प्रतापपुर के प्राचार्य रजनीश प्रसाद सिंह सर और पूरे महाविद्यालय के शिक्षकों को सम्मानित किया इसी क्रम में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रतापपुर के प्राचार्य भरत नाग शिक्षक सुजित मौर्य सर आदि शिक्षकों का सम्मान परिषद् के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया।
सम्मान प्राप्त शिक्षकों ने अभाविप कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के सम्मान कार्यक्रमों से शिक्षकों का उत्साह और मनोबल बढ़ता है तथा समाज में शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना और अधिक मजबूत होती है।
कार्यक्रम में अभाविप प्रतापपुर इकाई के नगर मंत्री बरत लाल आयम, धरमपुर नगर मंत्री नारायण राम पैकरा , नरेंद्र सिंह, राज यादव, अभिषेक कुशवाहा, श्याम यादव, महेश्वर पैकरा, आशीष सिंह , अनुराधा सिंह, दिव्या कश्यप, दिव्या श्रीवास्तव, सत्या, सूर्या पैकरा , दयाशंकर, मोनिका, प्रमोद सिंह,मीना , लक्ष्मी सहित बड़ी संख्या में अभाविप कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Binod Gupta Binod Gupta September 5, 2026
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सूरजपुर

गरीब आदिवासी नाबालिग बच्ची की जान की कीमत सिर्फ 20 हजार? सुमन चेरवा मौत मामले में नया मोड़, मजिस्ट्रियल जांच पर उठे गंभीर सवाल

पोस्टमार्टम के दौरान परिजनों को दूर रखने का आरोप, शुरुआती पुलिस बयान पर भी संदेह, डॉक्टर के कथित बयान ने खड़े किए नए सवाल

रायपुर । सूरजपुर/बलरामपुर । एक गरीब आदिवासी परिवार की नाबालिग बच्ची की संदिग्ध मौत का मामला अब केवल एक मौत की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। सुमन चेरवा मौत मामले में लगातार सामने आ रहे सवालों ने जांच प्रक्रिया, पुलिस कार्रवाई और कथित मजिस्ट्रियल जांच की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।

सबसे बड़ा और सबसे कड़वा सवाल यह है कि आखिर एक गरीब आदिवासी परिवार की लगभग 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची की जान की कीमत क्या सिर्फ 20 हजार रुपये है? यदि पीड़ित परिवार को किसी प्रकार की राशि दी गई है तो उसका उद्देश्य क्या था, किसने दी और किन परिस्थितियों में दी गई—इन सवालों का जवाब भी सार्वजनिक होना चाहिए।

मामले में अब जिस तरह से एक के बाद एक तथ्य और सवाल सामने आ रहे हैं, उसने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

पीएम रिपोर्ट नहीं आई, फिर आत्महत्या का निष्कर्ष कैसे?

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कथित तौर पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन शुरुआती स्तर पर थाना प्रभारी द्वारा बच्ची के फांसी लगाकर आत्महत्या करने की बात कही गई।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है।

जब अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य सामने नहीं आए थे, तब 12 वर्षीय बच्ची की मौत को आत्महत्या की दिशा में कैसे प्रस्तुत किया गया?

क्या पुलिस के पास कोई ऐसा ठोस साक्ष्य था जिसके आधार पर शुरुआती निष्कर्ष दिया गया, या फिर जांच शुरू होने से पहले ही मौत की कहानी तय कर दी गई थी?

एक नाबालिग बच्ची की संदिग्ध मौत के मामले में इतनी जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष की ओर बढ़ना स्वाभाविक रूप से संदेह को जन्म देता है।

पोस्टमार्टम के समय परिजनों को दूर रखने का आरोप

मृतका के परिजनों की ओर से गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान उन्हें दूर रखा गया। हालांकि इस संबंध में प्रशासनिक पक्ष और आधिकारिक रिकॉर्ड की स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी, लेकिन यदि संवेदनशील मामले में परिजनों को प्रक्रिया से पूरी तरह अलग रखा गया, तो यह जांच की पारदर्शिता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

परिजनों का सवाल सीधा है—

आखिर उन्हें पोस्टमार्टम प्रक्रिया से दूर क्यों रखा गया?

क्या पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी हुई?

क्या पूरी प्रक्रिया नियमानुसार और सक्षम अधिकारियों की मौजूदगी में हुई?

क्या जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया?

इन सवालों के जवाब अब प्रशासन को स्पष्ट रूप से देने होंगे।

डॉक्टर के कथित बयान ने बढ़ाया विवाद

मामले में नया मोड़ तब आया जब पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की ओर से कथित तौर पर यह बात सामने आई कि शव पंचनामा अथवा संबंधित प्रक्रिया के दौरान वहां वह स्वयं और कुछ पुलिसकर्मी मौजूद थे।

यदि यह कथन सही है तो सवाल और गंभीर हो जाते हैं।

क्या उस समय मजिस्ट्रेट की उपस्थिति आवश्यक थी?

यदि मजिस्ट्रियल जांच अथवा मजिस्ट्रेट की निगरानी में प्रक्रिया की बात कही जा रही थी तो संबंधित अधिकारी मौके पर क्यों नहीं थे?

क्या पूरी कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हुई?

यहां यह स्पष्ट होना जरूरी है कि किस चरण में मजिस्ट्रेट की उपस्थिति कानूनी रूप से अनिवार्य थी और किस चरण में नहीं। लेकिन प्रशासन को इस पूरे घटनाक्रम का दस्तावेजी विवरण सार्वजनिक करना चाहिए ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

एसपी के आदेश की अवहेलना का आरोप

मामले में यह भी आरोप सामने आया है कि पुलिस अधीक्षक स्तर से दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा संवेदनशील मामले में विशेष जांच या प्रक्रिया संबंधी निर्देश दिए गए थे और अधीनस्थ स्तर पर उनकी अवहेलना हुई, तो यह केवल लापरवाही का मामला नहीं बल्कि जवाबदेही का गंभीर विषय है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस संबंध में जब पुलिस अधीक्षक से सवाल किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

यहां सवाल उठता है—

क्या एक आदिवासी नाबालिग बच्ची की संदिग्ध मौत जैसे गंभीर मामले में एसपी कार्यालय तक पूरी जानकारी नहीं पहुंची?

यदि आदेश दिए गए थे तो उनके पालन की मॉनिटरिंग किसने की?

यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

12 साल की बच्ची और आत्महत्या की कहानी—जांच जरूरी

एक गरीब आदिवासी परिवार की 12 वर्षीय बच्ची, जो अपने घर और जिले से दूर कथित तौर पर काम करने पहुंची थी, उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती है।

यह अपने आप में कई गंभीर सवाल पैदा करता है।

एक नाबालिग बच्ची वहां काम करने कैसे पहुंची?

उसे किसने बुलाया?

उसके अभिभावकों की अनुमति और जानकारी क्या थी?

घटना से पहले उसके साथ कौन-कौन लोग मौजूद थे?

मौत का वास्तविक समय क्या है?

मौत की सूचना परिवार को कब दी गई?

घटनास्थल को किसने सुरक्षित किया?

क्या फॉरेंसिक टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए?

इन सभी सवालों के स्पष्ट जवाब के बिना केवल आत्महत्या की संभावना पर चर्चा करना जांच को लेकर संदेह बढ़ा सकता है।

20 हजार रुपये का सवाल: मदद या चुप्पी की कीमत?

मामले में 20 हजार रुपये को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

यदि पीड़ित परिवार को 20 हजार रुपये दिए गए हैं तो प्रशासन और जांच एजेंसियों को स्पष्ट करना चाहिए कि यह राशि—

* किसने दी?
* किस मद में दी गई?
* क्या यह सरकारी सहायता थी?
* क्या इसका कोई लिखित रिकॉर्ड है?
* क्या परिवार को किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए?
* क्या यह राशि कानूनी सहायता, अंतिम संस्कार सहायता या किसी अन्य उद्देश्य से दी गई?

एक गरीब आदिवासी परिवार के लिए 20 हजार रुपये बड़ी राशि हो सकती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी नाबालिग बच्ची की संदिग्ध मौत के बाद न्याय की लड़ाई को महज आर्थिक सहायता तक सीमित किया जा सकता है?

पीड़ित परिवार को सहायता मिलनी चाहिए, लेकिन सहायता न्याय का विकल्प नहीं हो सकती।

मजिस्ट्रियल जांच की मांग अब और तेज

लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब मामले की पूर्णतः स्वतंत्र और निष्पक्ष मजिस्ट्रियल जांच की मांग और मजबूत हो गई है।

लोगों की मांग है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि निम्न बिंदुओं की स्वतंत्र जांच की जाए—

1. बच्ची की मौत का वास्तविक कारण।
2. पोस्टमार्टम प्रक्रिया और उसकी वीडियोग्राफी।
3. शव पंचनामा की पूरी प्रक्रिया।
4. घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य।
5. बच्ची को काम के लिए बुलाने वाले लोगों की भूमिका।
6. मौत से पहले बच्ची के संपर्क में रहे सभी व्यक्तियों के बयान।
7. पुलिस द्वारा शुरुआती स्तर पर आत्महत्या की संभावना व्यक्त करने का आधार।
8. पुलिस अधीक्षक स्तर से दिए गए आदेश और उनके पालन की स्थिति।
9. 20 हजार रुपये की राशि किसने और क्यों दी।
10. यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया में लापरवाही हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही।

सवालों से भागने नहीं, जवाब देने होंगे

सुमन चेरवा की मौत अब सिर्फ एक पुलिस केस नंबर नहीं है। यह मामला एक गरीब आदिवासी परिवार की उस बेटी का है, जिसके परिवार को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसकी मौत आखिर किन परिस्थितियों में हुई।

यदि यह आत्महत्या है तो उसके ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सामने आने चाहिए।

यदि यह दुर्घटना है तो परिस्थितियां स्पष्ट होनी चाहिए।

और यदि किसी अपराध की आशंका है तो दोषियों तक कानून का हाथ पहुंचना चाहिए।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।

गरीब होना किसी परिवार का अपराध नहीं है और आदिवासी होना किसी बच्ची के न्याय के अधिकार को कम नहीं करता।

आज सवाल सिर्फ सुमन चेरवा का नहीं है।

सवाल यह है कि—

क्या व्यवस्था की नजर में गरीब की बेटी की मौत उतनी ही गंभीर है, जितनी किसी रसूखदार परिवार की बेटी की होती है?

क्या 20 हजार रुपये देकर एक परिवार के आंसुओं की कीमत तय की जा सकती है?

क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पहले आत्महत्या की कहानी तय कर दी गई?

क्या मजिस्ट्रियल जांच वास्तव में निष्पक्ष और स्वतंत्र होगी?

और सबसे बड़ा सवाल—

सुमन चेरवा की मौत का सच आखिर कब सामने आएगा?

अब प्रशासन और पुलिस के सामने केवल जांच पूरी करने की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास को कायम रखने की भी चुनौती है।

इस मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी, लापरवाही या तथ्यों को छिपाने की कोशिश हुई तो सवाल और गहरे होंगे।

एक मासूम बच्ची चली गई है… अब कम से कम उसके परिवार को सच और न्याय मिलना चाहिए।


#SumanCherwa #JusticeForSumanCherwa #TribalGirl #AdivasiGirl #MinorGirlDeath #SurajpurNews #ChhattisgarhNews #SuspiciousDeath #Magist

Binod Gupta Binod Gupta September 3, 2026
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अंबिकापुर




• “साइबर जागृति अभियान” के तहत सरगुजा पुलिस ने सीए एसोसिएशन कों साइबर अपराधों के प्रति किया जागरूक,नगर पुलिस अधीक्षक अंबिकापुर ने दिए साइबर सुरक्षा के टिप्स।।

:- सीए एसोसिएशन ने कार्यक्रम में जागरूकता शिविर आयोजित करने हेतु डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा का जताया आभार, समाज के प्रत्येक वर्ग कों साइबर फ़्रॉड से सुरक्षित रहने सरगुजा पुलिस प्रतिबद्ध।


अम्बिकापुर, 3 सितंबर 2026

⏩ डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा श्री राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के दिशा निर्देशन में साइबर अपराधों के प्रति नागरिकों कों जागरूक करने “साइबर जागृति अभियान”  के तहत प्रतिदिन कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है, इसी कड़ी में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सरगुजा पुलिस द्वारा विशेष साइबर जागरूकता शिविर के तहत व्याख्यान दिए गए। नगर पुलिस अधीक्षक अंबिकापुर श्री राहुल बंसल (भा.पु.से.) के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स को आधुनिक साइबर ठगी के तरीकों से अवगत कराना और उन्हें सुरक्षित रखना था। साइबर सुरक्षा से सम्बंधित ज्ञानवर्धक पहल के लिए सीए एसोसिएशन सरगुजा द्वारा डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा श्री राजेश अग्रवाल से भेंट कर आयोजित कार्यक्रम हेतु आभार प्रकट किया गया, एसोसिएशन के सदस्यों ने पुलिस विभाग की इस मुहिम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से न केवल प्रोफेशनल्स बल्कि आम नागरिकों में भी सुरक्षा की भावना मजबूत होती है।

⏩ डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा श्री राजेश अग्रवाल ने सम्मान के लिए सीए एसोसिएशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरगुजा पुलिस समाज के हर वर्ग को साइबर फ्रॉड से सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। सीए एसोसिएशन के सदस्यों ने सरगुजा पुलिस की इस पहल का स्वागत किया और आश्वस्त किया कि वे स्वयं जागरूक रहने के साथ-साथ अपने क्लाइंट्स और आम जनता को भी इसके प्रति सचेत करेंगे।

⏩ जागरूकता कार्यक्रम के दौरान नगर पुलिस अधीक्षक अंबिकापुर श्री राहुल बंसल ने सीए एसोसिएशन के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में वित्तीय लेनदेन पूरी तरह ऑनलाइन हो चुका है, जिसके कारण साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं। सीए समाज के एक बेहद महत्वपूर्ण वर्ग हैं, जिनके पास बड़े व्यवसायों और नागरिकों का वित्तीय डेटा होता है। इसलिए उनका साइबर रूप से सुरक्षित और जागरूक होना बेहद अनिवार्य है।

कार्यशाला में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई:-

वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव:- फिशिंग लिंक्स, फर्जी ई-मेल और स्पूफिंग कॉल्स के जरिए होने वाले फ्रॉड से कैसे बचें।

डेटा सुरक्षा:- क्लाइंट्स के संवेदनशील वित्तीय डेटा और पासवर्ड को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत सुरक्षा मानकों (जैसे टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) का उपयोग करना।

आधुनिक साइबर ट्रेंड्स:- वर्तमान में चल रहे इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और लोन ऐप स्कैम के तौर-तरीकों की केस स्टडीज के माध्यम से समझाइश।

त्वरित सहायता:- साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल केंद्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया।

इस दौरान साइबर एक्सपर्ट आरक्षक अनुज जायसवाल ने कार्यक्रम में उपस्थित चार्टर्ड एकाउंटेंट्स एसोसिएशन के सदस्यों कों तकनिकी संसाधनों के समुचित एवं सुरक्षित उपयोग करने की जानकारी दी गई एवं बारिकी से साइबर अपराध पर नियंत्रण करने के उपाए बताये गए।

⏩ कार्यक्रम में वरिष्ठ सीए एच.एस. जायसवाल, संयोजक धीरज अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी, सदस्य, जिले के समस्त सीए गण, नवाबिहान टीम की ओर से श्री अजय तिवारी, श्री मंगल पाण्डेय एवं उप निरीक्षक अभय तिवारी, साइबर सेल प्रभारी सहायक उप निरीक्षक अजीत मिश्रा, आरक्षक अनुज जायसवाल, राहुल केरकेट्टा मौजूद रहे।

Binod Gupta Binod Gupta September 3, 2026
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सूरजपुर

4 सितम्बर ‘श्री कृष्ण जन्माष्टमी‘ के अवसर पर मदिरा दुकानें रहेंगी बंद

*- कलेक्टर ने ‘श्री कृष्ण जन्माष्टमी‘ के अवसर पर मदिरा दुकानें बंद रखने की है अपील*

*सूरजपुर/03  सितम्बर 2026/*  कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 तथा छत्तीसगढ़ देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर बिक्री के अनुज्ञापनों के व्यवस्थापन नियम के अंतर्गत शासन द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए जारी निर्देशों के परिपालन में 04 सितम्बर ‘श्री कृष्ण जन्माष्टमी‘, दिन शुक्रवार को जिले में शासन द्वारा एक दिवसीय शुष्क दिवस घोषित किया है।
                   कलेक्टर ने अपील की है कि इस दिन जिले की समस्त देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें पूर्णतः बंद रहेंगी। इसके साथ ही प्रीमियम मदिरा दुकानों के परिसर से संलग्न अहाते भी बंद रखे जाएंगे। कलेक्टर ने संबंधित अनुज्ञप्तिधारियों एवं आबकारी अमले को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

Binod Gupta Binod Gupta September 3, 2026
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अंबिकापुर


अंबिकापुर की जर्जर सड़कों एवं रेल सेवाओं की बदहाली के खिलाफ माकपा ने उठाई आवाज
समयबद्ध सड़क मरम्मत और ट्रेनों का नियमित संचालन सुनिश्चित करने की मांग
अंबिकापुर,2 सितंबर 2026
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) सरगुजा जिला समिति, अंबिकापुर ने सरगुजा क्षेत्र में आम जनता को हो रही गंभीर समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन एवं रेलवे प्रशासन के समक्ष दो ज्ञापनों के माध्यम से मांगें रखी हैं। पार्टी ने अंबिकापुर शहर के आसपास की जर्जर सड़कों की तत्काल मरम्मत तथा क्षेत्र में रेल सेवाओं को समय-सारणी के अनुसार नियमित संचालित करने की मांग की है।
माकपा ने अपने ज्ञापन में कहा है कि 25 अगस्त 2026 को अंबिकापुर शहर के आसपास चारों ओर की एप्रोच सड़कें अत्यंत जर्जर होने, जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे होने तथा आवागमन के लायक नहीं रहने की स्थिति से प्रशासन को अवगत कराया गया था। पार्टी ने मांग की थी कि 30 अगस्त 2026 तक सड़कों को कम से कम चलने योग्य बनाया जाए, लेकिन निर्धारित समय तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। सड़कों की हालत और अधिक खराब हो गई है तथा आम नागरिकों को दुर्घटना के खतरे के बीच आवागमन करना पड़ रहा है।
माकपा ने कहा कि सड़कों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी हो रही है तथा लोगों को जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ रही है। पार्टी ने प्रशासन से सड़कों की तत्काल मरम्मत कराकर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है।
रेल सेवाओं की बदहाली पर भी जताई गंभीर चिंता
माकपा ने केंद्रीय रेल मंत्री सहित रेलवे के अधिकारियों को दिए ज्ञापन में कहा है कि पिछले लगभग 10–12 वर्षों से क्षेत्र में ट्रेनों का संचालन घोषित समय-सारणी के अनुरूप नहीं हो रहा है। वर्तमान में कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 18 से 20 घंटे तक विलंब से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में विशेष रूप से अंबिकापुर-दुर्ग ट्रेन क्रमांक 18242 के लगातार विलंब से चलने का उल्लेख किया गया है। सरगुजा संभाग के लोगों के लिए रायपुर जाने का यह अत्यंत महत्वपूर्ण साधन है। ट्रेन के विलंब से कार्यालयीन कार्य, शासकीय एवं निजी बैठकों में शामिल होने वाले लोगों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई परीक्षार्थी ट्रेन के विलंब के कारण निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
पार्टी ने बताया कि अंबिकापुर-दुर्ग ट्रेन कई महीनों से 5–6 घंटे विलंब से चल रही है। हाल ही में ट्रेन के विलंब के कारण रेलवे की परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों की परीक्षा तक छूट गई। इसी प्रकार शहडोल-अंबिकापुर मेमू ट्रेन भी अनियमित एवं विलंब से चल रही है, जबकि यह छात्रों, कर्मचारियों एवं आम यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण परिवहन साधन है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि ट्रेनों के समय की अनिश्चितता के कारण प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ रहती है। यात्री निर्धारित समय पर स्टेशन पहुंच जाते हैं, लेकिन ट्रेन कई घंटे बाद आती है। इस दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष परेशानी होती है। कई स्टेशनों पर पर्याप्त पेयजल, साफ-सफाई, शौचालय तथा खाने-पीने की उचित व्यवस्था भी नहीं होने की शिकायत की गई है।
माकपा ने दी आंदोलन की चेतावनी
माकपा सरगुजा जिला समिति ने प्रशासन एवं रेलवे प्रबंधन से मांग की है कि—
अंबिकापुर शहर एवं आसपास की जर्जर सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
सड़कों को सुरक्षित एवं आवागमन योग्य बनाया जाए।
अंबिकापुर से संचालित प्रमुख ट्रेनों का समय-सारणी के अनुसार नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए।
अंबिकापुर-दुर्ग ट्रेन क्रमांक 18242 को समय पर चलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
शहडोल-अंबिकापुर मेमू सहित अन्य ट्रेनों के संचालन में सुधार किया जाए।
रेलवे स्टेशनों पर पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई एवं अन्य यात्री सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
ट्रेनों के विलंब के कारण प्रतियोगी परीक्षार्थियों एवं आम यात्रियों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि ट्रेनों का समय पर संचालन एवं यात्रियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो माकपा जनहित में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी।
जारीकर्ता:
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
सरगुजा जिला समिति, अंबिकापुर (छत्तीसगढ़)

Binod Gupta Binod Gupta September 2, 2026
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सूरजपुर

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के गृह क्षेत्र में मॉडल आंगनबाड़ी की बदहाल हालत, जर्जर भवन में नौनिहालों की सुरक्षा पर सवाल
सूरजपुर/भैयाथान। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के गृह क्षेत्र में मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र की बदहाल स्थिति शासन की योजनाओं और जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। ग्राम पंचायत धर्मपुर स्थित मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र का भवन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में गिरने के हालत में नजर आ रहा है।
भवन की दीवारों पर जगह-जगह दरारें और उखड़ा हुआ प्लास्टर दिखाई दे रहा है। छत और दीवारों पर नमी के निशान हैं तथा भवन का रंग-रोगन भी पूरी तरह खराब हो चुका है। ऐसे जर्जर भवन में छोटे बच्चों के आने-जाने से उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। खास बात यह है कि यह मामला महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के गृह क्षेत्र से जुड़ा है। इसके बावजूद मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र की यह स्थिति विभागीय निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब शासन बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर बनाने की बात कर रहा है, तो जमीनी स्तर पर केंद्रों की ऐसी स्थिति चिंता का विषय है।
अप्रिय घटना से पहले हो मरम्मत ग्रामीणों ने प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से मांग की है कि केंद्र का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। भवन की तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत या नए भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि नौनिहालों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा और पोषण की सुविधा मिल सके।

Binod Gupta Binod Gupta September 2, 2026
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सूरजपुर

स्वच्छता पखवाड़ा के दूसरे दिन मनाया गया हरित विद्यालय दिवस

- कार्यशाला में जल संरक्षण, जल संकट, प्लास्टिक एवं पर्यावरण स्वच्छता पर…

Binod Gupta Binod Gupta September 2, 2026
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अंबिकापुर



दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार

:- थाना बतौली पुलिस टीम द्वारा मामले मे आरोपी के विरुद्ध की गई कार्यवाही।
:- आरोपी द्वारा पीड़िता से जबरन दुष्कर्म की घटना की गई थी कारित।
:- महिला सम्बन्धी अपराधों मे पुलिस टीम द्वारा की जा रही त्वरित कार्यवाही।

⏩ मामले का संछिप्त विवरण इस प्रकार हैं कि प्रार्थिया दिनांक 01/09/26 कों थाना बतौली आकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि कदनई सुगाझरिया थाना बतौली निवासी जयप्रकाश पैकरा द्वारा प्रार्थिया को अकेली देखकर पीड़िता के मना करने के बावजूद जबरन दुष्कर्म की घटना कारित किया गया है, प्रार्थिया के रिपोर्ट पर थाना बतौली में अपराध क्रमांक 113/26 धारा 296, 351 (3), 64(1) बी. एन. एस. का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया गया।

⏩ दौरान विवेचना पुलिस टीम द्वारा पीड़िता का कथन लेखबद्ध कर मामले के आरोपी का पता तलाश किया जा रहा था, पुलिस टीम के सतत प्रयास से मामले के आरोपी जयप्रकाश पैकरा को हिरासत में लेकर पुछताछ करने पर अपना नाम *जयप्रकाश पैकरा आत्मज सुदामा पैकरा उम्र 24 वर्ष साकिन कदनई सुगाझरिया थाना बतौली* का होना बताया, आरोपी से घटना के सम्बन्ध मे पूछताछ किये जाने पर घटना कारित किया जाना स्वीकार किया गया, आरोपी के विरुद्ध अपराध सबूत पाये जाने से प्रकरण मे आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है।

⏩ सम्पूर्ण कार्यवाही में थाना प्रभारी बतौली निरीक्षक विवेक सेंगर, प्रशिक्षु उप निरीक्षक शिव कुमार ध्रुव , महिला आरक्षक मेरी क्लोरेट, आरक्षक राजेश खलखो, राकेश एक्का, जोगी बड़ा सक्रिय रहे।

Binod Gupta Binod Gupta September 2, 2026
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अंबिकापुर



17 वर्ष पूर्व के मामले में जारी स्थाई वारंट तामिल, आरोपी गिरफ्तार

:- थाना कोतवाली पुलिस टीम द्वारा स्थाई वारंट किया गया तामिल।
:- एक्सीडेंट के मामले मे जारी वारंट पर की गई कार्यवाही।
:- आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष किया गया पेश।


⏩ डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा श्री राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) द्वारा जिले के सभी थाना/चौकी प्रभारियों को अपने अपने थाना छेत्र मे लंबित स्थाई वारंट/गिरफ़्तारी वारंट की तामिली कर वर्षो से फरार चल रहे वारंटियों कों माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के दिशा निर्देश दिए गए है, इसी क्रम मे थाना कोतवाली पुलिस टीम द्वारा आ.क्रमांक 265/09 धारा 279, 337, 338 भा.द.वि. के माममे मे फरार चल रहे आरोपी *रामभरत विश्वकर्मा आत्मज ननका विश्वकर्मा उम्र 35 वर्ष साकिन शिव मंदिर के पास थाना गांधीनगर* के प्रकरण मे उपस्थित नही रहने पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी का स्थाई वारंट जारी किया गया था, आरोपी कों न्यायालय के समक्ष पेश करने हेतु जारी स्थाई वारंट के अनुसार थाना कोतवाली पुलिस टीम के प्रयास से फरार चल रहे स्थाई वारंटी कों पकड़कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया हैं।

⏩ स्थाई वारंट की तामिली मे थाना प्रभारी कोतवाली उप निरीक्षक अखिलेश सिंह, सहायक उप निरीक्षक देवनारायण यादव, आरक्षक सचिन्द्र सिन्हा, संजीव पाण्डेय, अभिषेक सिंह सक्रिय रहे।

Binod Gupta Binod Gupta September 2, 2026
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