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सूरजपुर

स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नगर पालिका प्रशासन ने 7 दुकानदारों पर की जुर्माने की कार्रवाई

*सूरजपुर/18 अक्टूबर 2026/* नगर पालिका परिषद सूरजपुर द्वारा शहर में स्वच्छता व्यवस्था…

Binod Gupta Binod Gupta October 18, 2026
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सूरजपुर

करुण्य कार्यक्रम के तहत मरीजों के घर पहुंच रही आयुष विभाग की टीम

प्रत्येक शनिवार गृह भ्रमण कर मरीजों को दिया जा रहा स्वास्थ्य परामर्श एवं निःशुल्क औषधि वितरण

*सूरजपुर/18 अक्टूबर 2026/* कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के मार्गदर्शन एवं जिला आयुष…

Binod Gupta Binod Gupta October 18, 2026
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सूरजपुर

कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने कलेक्टर ने किसानों से की अपील

फसल विविधीकरण पर पात्र किसानों को मिलेगी आदान सहायता,लाभ लेने किसान 31 अक्टूबर तक कराएं पंजीयन

*सूरजपुर/18 अक्टूबर 2026/* कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे कृषक उन्नति योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना पंजीयन अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि योजना के तहत किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में एकीकृत किसान पोर्टल पर सहकारी समितियों के माध्यम से पंजीयन की प्रक्रिया जारी है, जिसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। कलेक्टर ने किसानों से अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना संबंधित सहकारी समिति में पहुंचकर पंजीयन कराने तथा आवश्यक प्रक्रिया समय पर पूर्ण करने का आग्रह किया है, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने एवं किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत धान के स्थान पर अन्य फसल लेने वाले पात्र किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा धान के बदले दलहन एवं तिलहन की फसल लेने वाले पात्र किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता प्रदान करने का प्रावधान है।
कलेक्टर श्रीमती जमील ने किसानों से शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की है।

Binod Gupta Binod Gupta October 18, 2026
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बलरामपुर


संयुक्त जिला कार्यालय बलरामपुर के सभाकक्ष में कोयला खनन और विभिन्न भ्रांतियों के समाधान हेतु महत्वपूर्ण बैठक संपन्न
दिनांक 16 अक्टूबर 2026 को संयुक्त जिला कार्यालय बलरामपुर के सभाकक्ष में ग्राम पंचायत चौंरा (जनपद पंचायत राजपुर) में कोयला खनन को लेकर विभिन्न भ्रांतियों के समाधान तथा आगामी कार्यवाही के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। 
इस बैठक में जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी (आईएएस), पुलिस अधीक्षक श्री वैभव बेंकर (भा.पु.से.), अपर कलेक्टर एवं अपर जिला मजिस्ट्रेट श्री रामशिला लाल, एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के क्षेत्रीय महाप्रबंधक श्री मनीष कुमार श्रीवास्तव तथा अन्य प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। बैठक के दौरान ग्राम पंचायत चौंरा के सरपंच, सचिव, पंचगण, वरिष्ठ नागरिक तथा प्रभावित भूमिस्वामी भी शामिल हुए। 
बैठक में मुख्य रूप से जिला पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन समिति के दिशा-निर्देशों तथा DGPS सर्वे के आधार पर आगे की जाने वाली कार्यवाही पर विस्तार से चर्चा की गई। चर्चा के दौरान ग्राम पंचायत में खनन गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों के मन में मौजूद विभिन्न प्रकार की शंकाओं और भ्रांतियों का प्रशासनिक स्तर पर तथ्यात्मक समाधान प्रस्तुत किया गया।
बैठक में जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा ग्रामीणों को बताया गया कि दशहरा के बाद कोयला खनन और विभिन्न भ्रांतियों के समाधान हेतु ग्राम पंचायत चौंरा में विशेष बैठक का आयोजन किया जाएगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में विकास कार्यों और खनन गतिविधियों का संचालन पूरी पारदर्शिता, नियमों के पालन और स्थानीय हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। बैठक में सभी पक्षों की सहमति और सकारात्मक सहयोग के साथ आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया को बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

Binod Gupta Binod Gupta October 16, 2026
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सूरजपुर

सूरजपुर जिले को मिली स्वास्थ्य सेवा की बड़ी सौगात, अब जरूरतमंदों के द्वार तक पहुंचेगा रेडक्रॉस इलाज

डॉक्टर आपके द्वार मोबाइल मेडिकल यूनिट से दूरस्थ अंचलों को मिलेगी राहत, राज्यपाल रमेन डेका और राज्य चेयरमैन तोमन साहू के प्रति रेडक्रॉस ने जताया आभार

आरईसी फाउंडेशन लिमिटेड के सीएसआर मद से मिली मोबाइल मेडिकल यूनिट, राज्य प्रतिनिधि अशोक अग्रवाल और जिला चेयरमैन बाबूलाल अग्रवाल के प्रयासों से साकार हुई पहल

सूरजपुर। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब चिकित्सा सुविधाओं से वंचित और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी की जिला शाखा को ‘डॉक्टर आपके द्वार’ मोबाइल मेडिकल यूनिट की सौगात मिली है। यह पहल उन परिवारों के लिए विशेष राहत लेकर आई है, जिन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत शुरू की गई इस व्यवस्था से ग्रामीण अंचलों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की उम्मीद मजबूत हुई है।

इस मोबाइल मेडिकल यूनिट की उपलब्धता में माननीय महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका, राज्य चेयरमैन तोमन साहू तथा आरईसी फाउंडेशन लिमिटेड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कंपनी के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) मद से प्राप्त इस वाहन को जिले तक पहुंचाने में रेडक्रॉस के राज्य प्रतिनिधि एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक अग्रवाल और सूरजपुर जिला चेयरमैन बाबूलाल अग्रवाल ने अथक प्रयास किए। इनके प्रयासों से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए एक नई राह खुली है।

जिला चिकित्सालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ‘डॉक्टर आपके द्वार’ एंबुलेंस सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे। मोबाइल मेडिकल यूनिट का उद्देश्य जरूरतमंदों को उनके नजदीकी क्षेत्र में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को अधिक व्यापक बनाना है।

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ जनकल्याणकारी पहल

कार्यक्रम के दौरान रेडक्रॉस में एक एमबीबीएस चिकित्सक, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट तथा ड्राइवर सह प्रशासनिक कर्मचारी सहित चार लोगों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कमलपुर और उप स्वास्थ्य केंद्र चंद्रामेढ़ा का लोकार्पण किया गया। हमार लैब तथा मेगा हेल्थ चेकअप कैंप का भी शुभारंभ हुआ। स्वास्थ्य मंत्री ने जिला चिकित्सालय का निरीक्षण कर उपचार व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।

समारोह में जरूरतमंदों को सहायता सामग्री देकर जनसेवा की भावना को भी मजबूती दी गई। दिव्यांगजनों को मोटर ट्राईसाइकिल, चश्मे, श्रवण यंत्र और सपोर्ट स्टिक वितरित किए गए। वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना कार्ड तथा टीबी मरीजों और निश्चय मित्रों को पोषण किट प्रदान की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से गोद भराई कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभिन्न शासकीय योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को भी आवश्यक सामग्री देकर लाभान्वित किया गया।

जिला चिकित्सालय में मरीजों और उनके परिजनों को सालभर भोजन एवं नाश्ता उपलब्ध कराने वाले वरिष्ठ नागरिक संघ, नेचर क्लब तथा मां भगवती योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। रक्तदान और अंगदान के क्षेत्र में योगदान देने वाले रक्तवीरों एवं अंगवीरों को सेवा सम्मान पत्र प्रदान किए गए। वहीं ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

राज्यपाल, राज्य चेयरमैन और पूरी टीम के प्रति जताया आभार

‘डॉक्टर आपके द्वार’ मोबाइल मेडिकल यूनिट की उपलब्धता पर कलेक्टर एवं इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी जिला शाखा की अध्यक्ष श्रीमती रैना जमील, जिला शाखा चेयरमैन बाबूलाल अग्रवाल तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिला शाखा सचिव प्रशांत सिंह ने हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने माननीय महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका, राज्य चेयरमैन तोमन साहू, राज्य प्रबंध समिति सदस्य अशोक अग्रवाल, राज्य शाखा कार्यालय, आरईसी फाउंडेशन लिमिटेड तथा इस पूरी पहल से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति हृदय से धन्यवाद और आभार प्रकट किया।

उन्होंने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए राज्य स्तर पर मिला सहयोग महत्वपूर्ण है। मोबाइल मेडिकल यूनिट की उपलब्धता से जनसेवा के कार्यों को नई मजबूती मिलेगी और जरूरतमंद लोगों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने के प्रयासों को विस्तार दिया जा सकेगा। इस उपलब्धि के पीछे राज्य नेतृत्व के मार्गदर्शन, सहयोगी संस्थाओं के योगदान और रेडक्रॉस के पदाधिकारियों के निरंतर प्रयासों का महत्वपूर्ण स्थान है।

शहर से दूर गांवों तक पहुंचे उपचार, तभी सार्थक होगी पहल

सूरजपुर जिले के कई ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना आज भी लोगों के लिए चुनौती बना रहता है। ऐसे में मोबाइल मेडिकल यूनिट जरूरतमंदों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब वाहन का नियमित संचालन हो, चिकित्सकीय दल समय पर उपलब्ध रहे और जरूरत के अनुसार गांवों तक पहुंचकर लोगों को जांच, परामर्श तथा आवश्यक उपचार की सुविधा प्रदान करे।

रेडक्रॉस की यह पहल इस सोच को आगे बढ़ाती है कि आर्थिक परेशानी, दिव्यांगता या दूरी किसी व्यक्ति के इलाज में बाधा नहीं बननी चाहिए। सूरजपुर को मिली यह सौगात स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश देती है।

कार्यक्रम में राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा, प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, भाजपा प्रदेश मंत्री एवं जिला प्रभारी  शिवनाथ यादव, पूर्व जिला अध्यक्ष  रामकृपाल साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा राजलाल राजवाड़े, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती स्वाति संत सिंह, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्रीमती कुसुमलता राजवाड़े, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष मनमत बछाड़, शिवनंदनपुर नगर पंचायत अध्यक्ष रितेश जायसवाल, विश्रामपुर नगर पंचायत उपाध्यक्ष  दीपेंद्र सिंह चौहान, वाइस चेयरमैन ओंकार पांडेय, आईआरसीएस कोषाध्यक्ष श्रवण जैन, वरिष्ठ समाजसेवी  भोला प्रसाद अग्रवाल, हरिदास अग्रवाल, अनिल गोयल, थलेश्वर साहू, अशोक सिंह, संत सिंह,  अजय श्याम, सतनारायण जायसवाल, शशिनाथ तिवारी,  दीपक गुप्ता, कपिल पांडेय,  रामानंद जायसवाल, ललित गोयल, कृष्ण कुमार गोयल (बल्लू), मुकेश गर्ग, प्रवेश गोयल,  राजीव प्रताप सिंह, अजय अग्रवाल, अरविंद मिश्रा, नीरज तायल, यशवंत प्रताप सिंह,  मनोज अग्रवाल, विकास अग्रवाल, नितेश गुप्ता, श्रीमती नूतन विश्वास, श्रीमती बीना गुप्ता, श्रीमती संध्या सिंह, डॉ. एच.एन. चतुर्वेदी, एल्डरमैन  शिवशंकर साहू, पूर्व पार्षद  अशरफ इराकी, विजय राजवाड़े,  हरीश राजवाड़े, सतेंद्र राजवाड़े,  सुनील साहू, सावन गोयल,  राजीव बंसल, पार्षद पवन साहू,  संस्कार अग्रवाल, शान्तनु सिंह चौहान और रंजन सोनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, रेडक्रॉस प्रबंध समिति के सदस्य, आजीवन सदस्य, पत्रकार, मीडिया प्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Binod Gupta Binod Gupta October 16, 2026
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सूरजपुर

मतदाता सूची में पात्र युवाओं का नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान जारी

*सूरजपुर/16 अक्टूबर 2026/*  भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार तथा कलेक्टर एवं जिला…

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सूरजपुर

प्रतापपुर में पहली बार निकली धर्म जागरण समन्वय की भव्य चुनरी यात्रा, 400 से 500 श्रद्धालुओं की रही सहभागिता
शीतला मंदिर से बस स्टैंड होते हुए मां के दरबार तक निकली चुनरी यात्रा, श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
प्रतापपुर। धर्म जागरण समन्वय के तत्वावधान में प्रतापपुर में पहली बार माता रानी के आशीर्वाद से भव्य चुनरी यात्रा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में लगभग 400 से 500 श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा की शुरुआत शीतला मंदिर से हुई, जो नगर के बस स्टैंड से होते हुए मां के दरबार तक पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ माता रानी को चुनरी अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस भव्य चुनरी यात्रा में प्रतापपुर नगर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में माताएं, बहनें और श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय माहौल देखने को मिला। जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया तथा फूल-मालाओं से यात्रा का अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सहयोग और सेवा भावना का भी विशेष उदाहरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं के लिए पानी की व्यवस्था की गई तथा भंडारे के माध्यम से प्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों ने अपनी सहभागिता से कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समाज को जागरूक करना रहा मुख्य उद्देश्य
धर्म जागरण समन्वय द्वारा आयोजित इस चुनरी यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना, सामाजिक जागरूकता बढ़ाना और माता रानी के प्रति श्रद्धा एवं भक्ति की भावना को मजबूत करना रहा। इस आयोजन ने नगरवासियों और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को एक साथ आने का अवसर प्रदान किया।
आयोजन की सफलता से उत्साहित श्रद्धालुओं ने भविष्य में भी इसी प्रकार धार्मिक, सामाजिक और जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की भावना व्यक्त की। इस भव्य आयोजन ने प्रतापपुर में धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और आपसी सहयोग का संदेश दिया।

Binod Gupta Binod Gupta October 16, 2026
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रायपुर संभाग

सीएम विष्णुदेव साय ने कार्टून बनाकर किया कार्टून फेस्टिवल का शुभारंभ
जयपुर के कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी को मिला लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
रायपुर। देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका कार्टून वॉच अपने प्रकाशन के 31वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। इस अवसर पर हर वर्ष की तरह राजधानी रायपुर में 13 अक्टूबर को होटल बेबीलॉन में कार्टून फेस्टिवल का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वयं कार्टून बनाकर समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी कार्टून बनाया।

इस अवसर पर जयपुर से आए कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी ने महज दो मिनट में मुख्यमंत्री का कैरिकेचर बनाया। वहीं, कार्टून वॉच के संपादक त्र्यंबक शर्मा ने भी दो मिनट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कैरिकेचर बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया।

तीन दशक तक पत्रिका का प्रकाशन बड़ी उपलब्धि : डॉ. हिमांशु द्विवेदी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथि वक्ता डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि आज के दौर में जब स्थापित समाचार पत्र भी दम तोड़ने लगे हैं, तब एक विलुप्त होती विधा पर लगातार तीन दशकों से पत्रिका का प्रकाशन अपने आप में आश्चर्यजनक है। इसके लिए पत्रिका के संपादक त्र्यंबक शर्मा साधुवाद के पात्र हैं।

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि वे पिछले 25 वर्षों से इस आयोजन से जुड़े हुए हैं। यह पहला अवसर है, जब सम्मानित होने वाले कार्टूनिस्ट उनके साथ काम कर चुके हैं। उन्होंने अभिषेक तिवारी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिलने पर शुभकामनाएं दीं।

नेताओं पर सबसे ज्यादा कार्टून बनते हैं : सांसद बृजमोहन अग्रवाल
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नेता लोग कार्टूनिस्टों के पसंदीदा विषय होते हैं और सबसे ज्यादा कटाक्ष भी हम नेताओं पर ही किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि विलुप्त होती इस विधा को तीन दशकों से सहेजकर रखना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।

कार्टून फेस्टिवल की अहमियत का अंदाजा इसके अतिथियों से लगाया जा सकता है : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कार्टून वॉच के कार्टून फेस्टिवल का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि वर्ष 2011 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और वर्ष 2012 में बालासाहेब ठाकरे भी इस आयोजन में शामिल हुए थे।

मुख्यमंत्री ने कैरिकेचर बुक का विमोचन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रकाशित यह कैरिकेचर पुस्तक अपने आप में अनूठी पहल है। उन्होंने इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए कार्टून वॉच को बधाई दी।

अपने जन्मस्थान पर सम्मानित होना भावुक क्षण : अभिषेक तिवारी
जयपुर के कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिलने के बाद कहा कि यह उनके लिए बेहद भावुक क्षण है, क्योंकि उनका सम्मान उसी स्थान पर हो रहा है, जहां उनका जन्म हुआ था। हालांकि, उनका पूरा जीवन भिंड और राजस्थान में बीता है।

उन्होंने बताया कि कार्टून बनाने के लिए विद्रोही स्वभाव उपयोगी होता है और यही स्वभाव उनके काम आया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार जब वेज बोर्ड लागू करती है, तो कार्टूनिस्ट को संपादक की तरह मान्यता देती है। इसलिए कार्टूनिस्ट को केवल कलाकार के रूप में नहीं देखना चाहिए।

अभिषेक तिवारी ने इस सम्मान के लिए कार्टून वॉच परिवार और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्टून वॉच से सीखा बहुत कुछ : आलोक शर्मा
मुंबई से आए कार्टूनिस्ट आलोक शर्मा ने बताया कि वह महज 15 वर्ष की उम्र में कार्टून वॉच से जुड़ गए थे। उस समय उन्हें प्रतिमाह 100 रुपये मिलते थे, जो उनके लिए बहुत बड़ी रकम थी।

उन्होंने कहा कि त्र्यंबक शर्मा उनके जीवन के पहले सेलिब्रिटी थे, जिनसे वे मिले थे। उनसे मिलने के लिए उन्होंने ढाई घंटे तक उनके घर पर इंतजार किया था। आलोक शर्मा ने कहा कि कार्टून वॉच से उन्होंने बहुत कुछ सीखा और यही वजह है कि आज वे लेखक, निर्देशक और एनिमेटर के रूप में पहचाने जाते हैं।

पत्रिका से जुड़े सदस्यों और लेखकों का विशेष सम्मान
इस अवसर पर संपादक त्र्यंबक शर्मा ने पत्रिका से जुड़े कुछ सदस्यों और लेखकों को सरप्राइज सम्मान के रूप में स्मृति चिह्न अतिथियों के हाथों प्रदान करवाए। इनमें व्यंग्य लेखिका डॉ. सारिका सिंघानिया को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।

इसके अलावा अख्तर अली, ई.वी. मुरली, राजेश गनोदवाले, प्रवीण शुक्ल, संजीव गुप्ता, रवि तिवारी, संघर्ष यदु, जयेन्द्र नारंग, आशीष त्रिपाठी और रितेश अग्रवाल को भी सम्मानित किया गया।

बच्चों ने भी दिखाई अपनी कलात्मक प्रतिभा
कार्यक्रम से पहले आयोजित परिचर्चा में श्रीमती एकता शर्मा, प्रफुल्ल पारे, अमरजीत चावला, अंजय शुक्ला, प्रभात मिश्रा, निशीथ ठाकुर, भगवत साहू, नवीन शर्मा और निर्मल चंद्र शर्मा सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर मिताली खोदियार ने कठपुतली के माध्यम से लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कार्टून, कैरिकेचर तथा पेंटिंग भी प्रदर्शित की गईं, जिन्हें बच्चों ने तैयार किया था। कोपलवाणी के बच्चों, संघर्ष यदु की पेंटिंग टीम तथा अंजनेय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और उनके शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के साथ समूह छायाचित्र भी खिंचवाया। इस दौरान बच्चों की कलात्मक प्रतिभा भी प्रदर्शित की गई।


समारोह में कार्टूनिस्ट धनेश दिवाकर, अजय सक्सेना, उज्ज्वल दीपक, यशवंत धोटे, प्रदीप जैन, कौशल किशोर शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।






Binod Gupta Binod Gupta October 15, 2026
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जिले में अवैध खनिज परिवहन पर कार्रवाई, 8 वाहन जब्त

अम्बिकापुर 15 अक्टूबर 2026/    जिले में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर लगातार कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में  14 एवं 15 अक्टूबर 2026 को खनिज अमले द्वारा अंबिकापुर एवं सीतापुर क्षेत्र में वाहनों की जांच की गई। इस दौरान बिना अभिवहन पास के खनिज रेत एवं ईंट का परिवहन करते पाए जाने पर तीन टिपर और पांच ट्रैक्टर सहित कुल आठ वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
जिला खनि अधिकारी ने बताया कि बिना वैध अभिवहन पास के खनिज परिवहन करते पाए जाने पर तीन टिपर वाहनों को जब्त कर कलेक्टर परिसर अंबिकापुर में रखा गया है, जब्त वाहनों में CG 15 EK 4164 टीपर वाहन मालिक अभिषेक वर्मा,  CG 15 EK 2457 वाहन मालिक सुमित गुप्ता, CG 15 DN 7006 वाहन मालिक सी.पी. शुक्ला शामिल है। वहीं, पांच ट्रैक्टरों के खिलाफ अवैध खनिज परिवहन का प्रकरण दर्ज कर उन्हें जप्त कर सीतापुर थाना परिसर में अभिरक्षा में रखा गया है, जिसमें CG15 AC 1242 ट्रेक्टर वाहन मालिक चन्द्रमणी सिंह, महेन्द्रा शोल्ड ट्रेक्टर वाहन मालिक अर्जुन यादव, सोनालिका शोल्ड ट्रेक्टर वाहन मालिक शंकर खलखो, महेन्द्रा शोल्ड लाल ट्रेक्टर वाहन मालिक दाउत लकड़ा, महेन्द्रा शोल्ड लाल ट्रेक्टर वाहन मालिक अर्जुन यादव शामिल है।

बताया गया कि इन सभी मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21(4) एवं एमएमडीआर अधिनियम की धारा 21(5) एवं 23 तथा छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 के तहत कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 में 22 जून 2026 को किए गए संशोधन के अनुसार, नियम 71(3) के तहत शमन शुल्क न्यूनतम 25 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा प्रशमन राशि न्यूनतम 25 हजार रुपये अथवा 2,000 रुपये प्रति टन, जो भी अधिक हो, वसूल की जाएगी। संबंधित मामलों में खनिज का बाजार मूल्य भी वसूल किया जाएगा। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

Binod Gupta Binod Gupta October 15, 2026
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सरगुजा संभाग

पत्रकारों, एक्टिविस्टों और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के खिलाफ शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग
सरगुजा में दर्ज चार एफआईआर और काउंटर-वर्जन की समीक्षा की उठी मांग, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, डीजीपी और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन सौंपने का उल्लेख
अम्बिकापुर, सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जनहित से जुड़े मुद्दों को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उठाने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं (एक्टिविस्टों) तथा सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के खिलाफ कथित दुर्भावनापूर्ण शिकायतों, चरित्र-हनन और आपराधिक कानूनों के संभावित दुरुपयोग का मामला चर्चा में है। इस संबंध में जागरूक नागरिकों और प्रभावित पक्षों की ओर से छत्तीसगढ़ शासन के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रेंज सरगुजा तथा पुलिस अधीक्षक सरगुजा सहित संबंधित अधिकारियों को विस्तृत आवेदन सौंपे जाने का उल्लेख किया गया है। आवेदन में मांग की गई है कि संबंधित शिकायतों, प्राथमिकी, परस्पर विरोधी बयानों और डिजिटल साक्ष्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा की जाए, ताकि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई केवल आरोपों, आशंकाओं या बाहरी प्रभाव के आधार पर न हो।
जनहित के मुद्दे उठाने वालों पर दबाव बनाने का आरोप
आवेदन में आशंका जताई गई है कि सरगुजा जिले में प्रशासनिक कार्रवाई, सामाजिक घटनाओं और जनहित से जुड़े मामलों को सामने लाने वाले कुछ पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को शिकायतों तथा कथित अपमानजनक टिप्पणियों के माध्यम से दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है।
आवेदनकर्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल घटनाओं की जानकारी साझा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जनसमस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाने का काम भी करते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की जाती है, तो उसकी जांच उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।
हालांकि, किसी शिकायत का दुर्भावनापूर्ण होना या किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर चरित्र-हनन किया जाना जांच का विषय है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों के बयान, उपलब्ध दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होगा।
सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करना अपने आप में आपराधिक षड्यंत्र नहीं
आवेदन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि एक ही क्षेत्र में जनहित के मुद्दों पर काम करने वाले पत्रकारों, एक्टिविस्टों और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के बीच किसी घटना को लेकर संपर्क होना, जानकारी साझा करना, किसी पोस्ट को आगे बढ़ाना अथवा किसी पीड़ित का पक्ष सामने लाना सामान्य गतिविधियों का हिस्सा हो सकता है।
आवेदनकर्ताओं के अनुसार, केवल इस आधार पर कि कई लोग किसी घटना की जानकारी साझा कर रहे हैं या एक ही मुद्दे पर सक्रिय हैं, उनके बीच आपराधिक षड्यंत्र होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। किसी भी गंभीर आरोप के लिए संबंधित व्यक्ति की वास्तविक भूमिका, कथित कृत्य, उपलब्ध साक्ष्य और लागू कानूनी प्रावधानों का परीक्षण किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि यदि किसी पोस्ट, वीडियो, ऑडियो या संदेश के आधार पर आपराधिक आरोप लगाए गए हैं, तो उसकी वास्तविकता, संदर्भ, स्रोत और प्रसार की परिस्थितियों की भी जांच की जानी चाहिए। डिजिटल सामग्री के अधूरे अंश या संदर्भ से अलग किए गए संदेश के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना जरूरी है।
4 अक्टूबर 2026 को दर्ज चार एफआईआर का दिया गया संदर्भ
आवेदन में 4 अक्टूबर 2026 को अम्बिकापुर के थाना कोतवाली और अजाक थाना में दर्ज चार प्राथमिकी का उल्लेख करते हुए उनके क्रम, समय और नामजद व्यक्तियों की भूमिका की समीक्षा की मांग की गई है।
आवेदन में उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, संबंधित मामले इस प्रकार हैं:
1. एफआईआर क्रमांक 0702/2026 — थाना कोतवाली
दिनांक 4 अक्टूबर 2026 को शाम 6:04 बजे दर्ज इस प्राथमिकी में शिकायतकर्ता के रूप में आकांक्षा टोप्पो का नाम बताया गया है। आवेदन में दिए गए विवरण के अनुसार, इस मामले में धीरज सिंह नामजद हैं तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख है।
इस मामले में किन विशिष्ट धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है और शिकायत में क्या तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं, इसकी पुष्टि प्राथमिकी की प्रमाणित प्रति से की जानी आवश्यक है।
2. एफआईआर क्रमांक 0015/2026 — अजाक थाना
दिनांक 4 अक्टूबर 2026 को रात 9:26 बजे दर्ज इस प्राथमिकी में सुनीता सोनहा शिकायतकर्ता हैं और रविन्द्र तिवारी का नाम नामजद व्यक्ति के रूप में दिया गया है।
आवेदनकर्ताओं ने इस प्रकरण को भी संबंधित घटनाक्रम के संदर्भ में रखते हुए इसकी निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है। मामले में दर्ज आरोपों, लागू धाराओं और उपलब्ध साक्ष्यों का वास्तविक विवरण प्राथमिकी तथा विवेचना से संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
3. एफआईआर क्रमांक 0703/2026 — थाना कोतवाली
उपलब्ध विवरण के अनुसार, 4 अक्टूबर 2026 को रात 9:32 बजे दर्ज इस प्राथमिकी में शैलेन्द्र शर्मा शिकायतकर्ता हैं। इसमें आकांक्षा टोप्पो, अकील अहमद अंसारी और अन्य व्यक्तियों के नाम शामिल होने की बात कही गई है।
इस प्रकरण को लेकर आवेदनकर्ताओं ने संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अलग-अलग परीक्षण करने की मांग की है। उनका तर्क है कि एक ही घटनाक्रम में कई लोगों के नाम सामने आने की स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति के कथित कृत्य और उसके समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए।
4. एफआईआर क्रमांक 0704/2026 — थाना कोतवाली
आवेदन में उल्लेखित चौथी प्राथमिकी 4 अक्टूबर 2026 को रात 10:38 बजे दर्ज बताई गई है। इसमें धीरज सिंह शिकायतकर्ता हैं, जबकि आकांक्षा टोप्पो और कैमरामैन दिनेश यादव के नाम नामजद व्यक्तियों के रूप में दिए गए हैं।
आवेदनकर्ताओं ने इस प्रकरण को पहले दर्ज मामलों के साथ जोड़कर देखने तथा संबंधित शिकायतों और प्रतिशिकायतों के तथ्यों की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि उपरोक्त विवरण आवेदन में उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। एफआईआर की प्रमाणित प्रतियों, उनमें उल्लिखित धाराओं और पुलिस के आधिकारिक पक्ष का स्वतंत्र सत्यापन किए बिना किसी भी मामले की प्रकृति या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी के संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

परस्पर विरोधी शिकायतों में स्वतंत्र जांच पर जोर

आवेदनकर्ताओं का कहना है कि जब किसी घटनाक्रम में अलग-अलग पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराते हैं, तो पुलिस के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक शिकायत में लगाए गए आरोपों का अलग-अलग परीक्षण किया जाए।
उनके अनुसार, केवल एफआईआर दर्ज होने या किसी व्यक्ति का नाम शिकायत में शामिल होने से आरोप स्वतः प्रमाणित नहीं हो जाते। इसी तरह, किसी शिकायत को बिना जांच के झूठा या दुर्भावनापूर्ण भी घोषित नहीं किया जा सकता।
ऐसी परिस्थितियों में घटनाक्रम का क्रम, शिकायत दर्ज होने का समय, संबंधित पक्षों के बयान, उपलब्ध वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पोस्ट, संदेश तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
आवेदन में मांग की गई है कि जांच के दौरान इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाए और प्रत्येक नामजद व्यक्ति की वास्तविक भूमिका के संबंध में साक्ष्य-आधारित निष्कर्ष निकाला जाए।

डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता की जांच जरूरी

सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी वीडियो, ऑडियो क्लिप, स्क्रीनशॉट या संदेश को जांच में शामिल करने से पहले उसकी प्रामाणिकता, मूल स्रोत, उपलब्ध पूर्ण रिकॉर्ड और संदर्भ की जांच आवश्यक हो सकती है।
आवेदनकर्ताओं ने मांग की है कि यदि संबंधित मामलों में डिजिटल सामग्री को आधार बनाया गया है, तो उसकी तकनीकी जांच कराई जाए। आवश्यकता के अनुसार मूल फाइल, मेटाडेटा, उपलब्ध डिवाइस और अन्य प्रासंगिक डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जाए, ताकि संपादित, अधूरी या संदर्भ से अलग सामग्री के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध अनुचित कार्रवाई की आशंका दूर हो सके।
साथ ही, डिजिटल साक्ष्यों की जांच निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष की शिकायत या बचाव को केवल उसकी सामाजिक अथवा पेशेवर पहचान के आधार पर न परखा जाए।

पुलिस की जिम्मेदारी: निष्पक्ष विवेचना और कानून का समान अनुपालन

आवेदन में यह भी कहा गया है कि पुलिस की जिम्मेदारी शिकायत प्राप्त करने और प्राथमिकी दर्ज करने तक सीमित नहीं है। विवेचना के दौरान आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटाना, संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करना और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करना भी आवश्यक है।
आवेदनकर्ताओं ने आशंका व्यक्त की है कि यदि आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल व्यक्तिगत विवाद, प्रतिशोध या किसी की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है, तो इससे न केवल संबंधित व्यक्तियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी भय और अविश्वास की स्थिति पैदा हो सकती है।
हालांकि, यह तय करना कि किसी मामले में कानून का दुरुपयोग हुआ है या नहीं, संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों की जांच के बाद ही संभव है। इसलिए आवेदनकर्ताओं ने सभी पक्षों को निष्पक्ष जांच का अवसर देने और कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

वरिष्ठ अधिकारियों से की गई प्रमुख मांगें

आवेदन में संबंधित अधिकारियों से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की गई है:
चारों प्राथमिकी की निष्पक्ष समीक्षा: 4 अक्टूबर 2026 को दर्ज बताए गए एफआईआर क्रमांक 0702/2026, 0015/2026, 0703/2026 और 0704/2026 की तारीख, समय, आरोपों, लागू धाराओं तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समीक्षा की जाए।
प्रत्येक नामजद व्यक्ति की भूमिका का परीक्षण: किसी व्यक्ति का नाम शिकायत में शामिल होने मात्र के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय उसकी कथित भूमिका और उसके समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों की अलग-अलग जांच की जाए।
डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी परीक्षण: संबंधित ऑडियो, वीडियो, स्क्रीनशॉट, सोशल मीडिया पोस्ट और संदेशों की प्रामाणिकता की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों से जांच कराई जाए।
परस्पर विरोधी शिकायतों की निष्पक्ष विवेचना: सभी पक्षों की शिकायतों, बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच की जाए।
गंभीर आपराधिक धाराओं का विधिसम्मत प्रयोग: लागू कानूनों और उपलब्ध साक्ष्यों के अनुरूप ही धाराओं का इस्तेमाल किया जाए तथा किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव से बचा जाए।
जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही: विवेचना निष्पक्ष ढंग से की जाए और कानून के अनुसार संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।
पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा: जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने वाले लोगों की सुरक्षा और वैधानिक अधिकारों के संरक्षण के साथ-साथ शिकायतकर्ताओं के अधिकारों का भी सम्मान सुनिश्चित किया जाए।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष जांच के बीच संतुलन जरूरी

भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(क) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। पत्रकारिता, जनहित के मुद्दों पर चर्चा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। हालांकि, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कानून के अधीन है और इसका इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए नहीं किया जा सकता।
इसी तरह, किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का अधिकार भी कानून के तहत संरक्षित है। इसलिए किसी भी विवाद में यह आवश्यक है कि शिकायतकर्ता की बात सुनी जाए, आरोपित व्यक्ति को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का अवसर मिले और जांच उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़े।
आवेदनकर्ताओं का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित मामलों में किन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं और किन पहलुओं पर आगे जांच की आवश्यकता है।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा वास्तविक घटनाक्रम
सरगुजा में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों से जुड़े इन मामलों में आवेदनकर्ताओं ने वरिष्ठ अधिकारियों से त्वरित संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, इसलिए किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
अब इस मामले में संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा। आवेदन पर कार्रवाई, संबंधित प्राथमिकी की विवेचना और डिजिटल साक्ष्यों के परीक्षण से ही घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल, आवेदनकर्ताओं की मांग है कि सभी संबंधित मामलों की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित तरीके से की जाए, ताकि दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो और निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की भी रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Binod Gupta Binod Gupta October 15, 2026
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